राजनीति शास्त्र

राजनीति शास्त्र वह विज्ञान है जो मानव के एक राजनीतिक और सामाजिक प्राणी होने के नाते उससे संबंधित राज्य और सरकार दोनों संस्थाओं का अध्ययन करता है।

परिचय, अर्थ और परिभाषा।

★ राजनीति विज्ञान का उद्भव अत्यंत प्राचीन है। यूनानी विचारक अरस्तु को राजनीति विज्ञान का पिता कहा जाता है तथा यूनानी चिंतन में प्लूटो का आदर्शवाद एवं अरस्तु का बुद्धि बाद समाहित है ।

★राजनीति का पर्यायवाची अंग्रेजी शब्द ‘पॉलिटिक्स’ यूनानी भाषा के पॉलिश से बना है जिसका अर्थ – नगर अथवा राज्य होता है ।

★ प्राचीन यूनान में प्रत्येक नगर एक स्वतंत्र राज्य के रूप में संगठित होता था और पॉलिटिक्स शब्द से उन नगर राज्यों से संबंधित शासन की विधा का बोध होता था । धीरे-धीरे नगर राज्यों का स्थान राष्ट्रीय राज्यों ने ले लिया अतः राजनीति भी राज्य के विस्तृत रूप से संबंधित विधा हो गई।

★राज्य से संबंधित विषयों का अध्ययन राजनीति शास्त्र अथवा राजनीति विज्ञान कहा जाता है ।

★राजनीति विज्ञान का अध्ययन नीतिशास्त्र, दर्शनशास्त्र, इतिहास एवं विधि शास्त्र आदि की अवधारणाओं के आधार पर ही करने की परंपरा थी । पर आधुनिक समय में इस एक स्वतंत्र विषय के रूप में स्वीकार किया गया है।

★ राजनीति विज्ञान का महत्व इस तथ्य से प्रकट होता है कि आज राजनीतिक प्रक्रिया का अध्ययन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की राजनीति को समझने के लिए किया जाता है। आज राजनीति विज्ञान ‘राजनीतिक एवं गैर राजनीतिक’ दोनों प्रकार के तत्वों से संबंधित है ।

★राजनीतिक तत्व प्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक प्रक्रियाओं को संचालित करते हैं। इसमें राज्य, सरकार ,सरकारी संस्थाएं, चुनाव प्रणाली और राजनीतिक व्यवहार आते हैं। गैर राजनीतिक तथा अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक प्रक्रियाओं को संचालित करने में योगदान देते हैं। इस कारण से राजनीति की सही समझ इनको समन्वित करके ही प्राप्त किया जा सकता है।

परंपरागत राजनीति विज्ञान के विद्वानों ने राजनीति विज्ञान के विभिन्न विभिन्न परिभाषाएं दी है।

1 – राजनीति विज्ञान राज्य का अध्ययन है।

★अनेक राजनीतिक शास्त्रियों की मान्यता है की प्राचीन काल से ही राजनीति विज्ञान ‘राज्य’ नामक संस्था के अध्ययन का विषय है।

★विद्वानों की मान्यता है कि प्राचीन काल से आधुनिक काल तक राजनीतिक विज्ञान का केंद्रीय तत्व राज्य ही रहा है अतः राजनीति विज्ञान में राज्य का है अध्ययन किया जाना चाहिए।

डॉक्टर गार्नर के अनुसार – राजनीति विज्ञान का प्रारंभ और अंत राज्य के साथ होता है।

ब्लुंशली के अनुसार – राजनीति शास्त्र वह विज्ञान है जिसका संबंध राज्य से है और जो यह समझने का प्रयत्न करता है कि राज्य के आधारभूत तत्व क्या है, उसका आवश्यक स्वरूप क्या है, उसकी किन किन विविध रूपों में अभिव्यक्ति होती है, तथा उसका विकास कैसे हुआ

2– राजनीति विज्ञान सरकार का अध्यन है।

★ कुछ राजनीति शास्त्रियों का मानना है कि राज्य नहीं बल्कि इसमें सरकार का अध्ययन किया जाना चाहिए। इनका मानना है कि राज्य मात्र मनुष्यों का संगठन मात्र है उसकी क्रियात्मक अभिव्यक्ति सरकार के द्वारा होती है।

★ इनका तर्क है कि राज्य एक अमूर्त संरचना है जबकि सरकार एक मूर्त एवं प्रत्यक्ष संस्था है और सरकार ही संप्रभुता का प्रयोग करते हैं।

लीकॉक के अनुसार– राजनीति विज्ञान सरकार से संबंधित शास्त्र है

3– राजनीति विज्ञान राज्य एवं सरकार दोनों का अध्ययन है।

★कुछ विद्वानों का मानना है केवल राज्य केवल सरकार की दृष्टि से अपनाई गई परिभाषाएं अपूर्ण है। वस्तुतः राज्य और सरकार दोनों का घनिष्ठ संबंध है और किसी एक के बिना दूसरे का अध्ययन करना व्यर्थ है।

★ राज्य यदि अमूर्त संरचना है तो सरकार इसे मूर्त व भौतिक रूप प्रदान करती है और राज्य अगर प्रभु-सत्ता को धारण करती है तो सरकार उसका उपयोग करती है।

डीकॉक के अनुसार – राजनीति विज्ञान का संबंध राज्य तथा उसके साधन सरकार से है।

4 – राजनीति विज्ञान मानव तत्व के संदर्भ में अध्ययन है।

★राजनीति शास्त्र उपरोक्त परिभाषाओं को पूर्ण नहीं मांगते हैं,क्योंकि इसमें मानव-तत्व की उपेक्षा की गई है ।

★राज्य या सरकार का अध्ययन बिना मानव के उद्देश्यहीन एवं महत्वहीन है, क्योंकि इसका निर्माण मानव हित के लिए ही हुआ है अतः मानव तत्व का अध्ययन अनिवार्य है।

इसके आगे राजनीति का स्वरूप और उसका विषय क्षेत्र के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

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